Yayati Quotes

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Yayati Quotes
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“In happiness and misery, remember one thing. Sex and wealth are the great symbols of manhood. They are inspiring symbols. They sustain life. But they are unbridled. There is no knowing when they will run amuck. Their reins must at all times be in the hands of duty.� Oh man, desire is never satisfied by indulgence. Like the sacrificial fire, it ever grows with every offering.”
― Yayati: A Classic Tale of Lust
― Yayati: A Classic Tale of Lust
“A creeper has many flowers; some are offered to God in worship and so arouse devotion. Some adorn the lovely ringlets of maidens and are silent witnesses to the hours of love and pleasures indulged in. The same is true of humans born in this world. Some live to be old and some rise to honour and fame and some are crushed by poverty. But in the end, all these flowers fall to the ground and are lost in the earth.”
― Yayati: A Classic Tale of Lust
― Yayati: A Classic Tale of Lust
“Gods are addicted to the pleasures and the demons are blindly worshipping power.”
― Yayati: A Classic Tale of Lust
― Yayati: A Classic Tale of Lust
“निरंकु� वासन� की क्षणिक पूर्ति प्रे� तो नही�”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“प्रे� मनुष्य को अपने से पर� देखन� की शक्त� देता है�”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“शब्द की अपेक्ष� स्पर्श कभी-कभी बहुत कु� कह जाता है�”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“जग माणसाच्य� मनातल्या दयेव� चालत नाही. ते त्याच्या मनगटातल्या बळाव� चालत�. माणू� केवळ प्रेमावर जग� शक� नाही. तो इतरांच� पराभ� करून जगतो. मनुष्य या जगात जी धडपड करतो, ती भोगासाठी! त्यागाची पुराणं देवळात ठी� असता�; पण जीवन हे देवालय नाही! ते रणांगण आह�.”
― YAYATI
― YAYATI
“ऐश्वर्� जितन� बड़ा हो उतने ही शिष्टाचा� के बंधन अधिक कठोर होते है�!”
― Yayati: A Classic Tale of Lust
― Yayati: A Classic Tale of Lust
“विविधत� ही इस जीवन की दे� है� परस्पर विरोधी बाते� ही उसकी आत्म� हैं। जीवन का रस उसका आनंद उसका सम्मोह� उसकी आत्म�...इसी विविधत� मे� है, विरो� मे� है�”
― Yayati: A Classic Tale of Lust
― Yayati: A Classic Tale of Lust
“कहाँ थी मै�? इन्द्रलो� के नंदनवन मे�? मंदाकिनी मे� बहती आई हरसिंगार की से� पर? मलयगिर� से चलने वाली शीतल सुगंधि� पव� के झकोरों पर? या विश्� के अज्ञात सौंदर्� की खो� मे� निकल� किसी महाकवि की नौका मे�?”
― Yayati: A Classic Tale of Lust
― Yayati: A Classic Tale of Lust
“सच तो यही है कि इस संसा� मे� हर को� केवल अपने लि� ही जिया करता है� मनुष्य सु� के लि� अपने निकट के लोगो� का सहार� ठी� उसी तर� खोजत� है� जैसे वृक्षलताओं की जड़े� पा� की आर्द्रता की ओर मुड़ जाती हैं। इसी झुका� को दुनिया कभी प्रे� कहती है कभी प्रीति, तो कभी मैत्री� लेकि� वास्तव मे� वह होता है आत्मप्रे� ही� एक तर� की आर्द्रता नष्ट होते ही पेड़-पौधे सू� नही� जाते है� उनकी जड़े� किसी और आर्द्रता की खो� मे� दूसरी ओर मुड़ जाती हैं–व� आर्द्रता नज़दी� हो या दूर–औ� उस� खोजक� वे फि� से लहलहान� लगते है�”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“The world errs, even realises the errors, but seldom learns from them.”
― Yayati: A Classic Tale of Lust
― Yayati: A Classic Tale of Lust
“never forget that it is easier to conquer the world than to master the mind ...”
― Yayati: A Classic Tale of Lust
― Yayati: A Classic Tale of Lust
“संस्कृति ने मनुष्य को हमेश� बाह्यत� बदला है� उसका अन्तरं� आज भी वैसी ही अंधी जीवन-प्रेरणओं के पीछे भागत� रहने वाले पश� के समान है�”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“दुनिया मे� केवल ती� ही बाते� सत्य हैं–मृगया, मदिर�, मदिराक्षी� इन तीनो� के सहवा� मे� आदमी अपने सारे दुःख भू� जाता है�”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“कलाकार के दुःख से ही उसकी कल� अधिक सजी�, अधिक सुंद� और अधिक रसीली बन जाती है? क्या प्रकृत� का यही अलिखित नियम है कि कलाकार दुखी रह�?”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“बच्च� बड़े होने लग� तो मा�-बा� से दू� जाने लगते हैं। प्रीति और पराक्र� दोनो� युवा मन की प्रब� प्रेरणाए� हु� करती हैं। किशो�-किशोरियो� को अपने बचपन की सुरक्षित दुनिया से भुलावा देकर वे काफी दू� ले जाया करती हैं। किन्तु मा�-बा� उनकी चिन्ता करते हु� उसी पुरानी दुनिया मे� चक्क� काटा करते”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“कु� लो� ऐस� होते है कि उन्हें हमेश� प्रे� की आर्द्रता की आवश्यकता हु� करती है� वह आर्द्रता � मिली तो वे सू� जाते हैं।”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“जीवन और मृत्यु! कितन� क्रू� खे� है यह! क्या केवल यह खे� खेलन� के लि� ही मनुष्य इस संसा� मे� आत� है?”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“युवती के लि� अपने पत� की केवल पत्नी बनना काफी नही� है� उस� तो उसकी सखी, उसकी बह�, उसकी कन्या–यही क्यो�, मौका आन� पर उसकी मा� भी बनना पड़त� है!”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“भाग्� की गत� अत्यंत विचित्� और निर्मम होती है, देवयानी! देखत� ही देखत� आकाश की उल्क� को वह धरती का पाषा� बन� के छोड़ता है!”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“वह हँसी मात्� एक प्रेयसी की हँसी नही� थी� वह एक मानिनी की भी हँसी थी� अपने सौन्दर्य के बल पर पुरु� को भी चरणो� मे� झुका सकने के अहंकार मे� मदहो� रमणी की हँसी थी वह”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“सभी कव� यही कहते है� कि कल� के बिना प्रे� मे� मिठा� नही� आती!”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“कहीें दुनिया की ये दार्शनिक बाते� केवल दूसरों से कहने के लि� तो नही� होती�? लेकि� मु� जैसे बूढ़� की बा� को या� रखना–इ� द्वंद्वपूर्ण जीवन मे� दार्शनिक सिद्धांत ही मानव का अन्तिम सहार� है�”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“एक बा� कभी � भुलाना–शरी�-सु� मानव जीवन का मुख्� निकष नही� है� आत्म� का सन्तोष ही वह निकष है!”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“दे� विलासिता के अन्ध� उपास� हैं। दैत्� शक्त� की अंधी उपासना करते हैं। ये दोनो� उपास� जगत् को सुखी बनान� मे� असमर्थ हैं।”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“पुरु� पराक्र� के लि� ही पैदा होते हैं।”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“जीवन के प्रारं� मे� अर्थही� लगने वाली बाते� ही जीवन के अन्तिम चरणो� मे� बहुत ही गहरा अर्थ रखने वाली प्रती� होने लगती हैं।”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]
“आदमी ज़िन्दगी के अन्तिम मोड़ पर कु� सयान� अवश्� हो जाया करता है, लेकि� यह समझदारी दूसरों की ठोकरों से नही�, बल्क� उसके अपने ज़ख्मो� से आय� करती है�”
― ययात� [Yayati]
― ययात� [Yayati]