Hindi Poem Quotes
Quotes tagged as "hindi-poem"
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“Farsi Couplet:
Agar firdaus bar roo-e zameen ast,
Hameen ast-o hameen ast-o hameen ast.
English Translation:
If there is a paradise on earth,
It is this, it is this, it is this”
― The Writings of Amir Khusrau: 700 Years After the Prophet: A 13th-14th Century Legend of Indian-Sub-Continent
Agar firdaus bar roo-e zameen ast,
Hameen ast-o hameen ast-o hameen ast.
English Translation:
If there is a paradise on earth,
It is this, it is this, it is this”
― The Writings of Amir Khusrau: 700 Years After the Prophet: A 13th-14th Century Legend of Indian-Sub-Continent
“Kaun bata sakta hai yeh mulaqaat pehli yaan aakhri hai..
Na jaane kitni baar mil chuka hoon tujhse aur kitni baar abhi milna baaki hai...
Har daur mein hota hai koi kirdaar mere jaisa..
Na jaane kitne qisson me zikar hai mera aur kitni kahaniyon mein abhi likhna baaki hai...
Sadiyon se chal hoon ekk kaafile ke saath saath..
Na Jaane kin Manzilon ki talaash hai aur kahan abhi Pahunchna baaki hai...
Suna hai Sau raaste jaate hai usski jaanib ki taraf ...
mujhe ek bhi nai mila, lagta hai nasamajh kadmon ka abhi Bhatkna baaki hai...
Na thama hai, na hi thamega yeh ranjishon ka silsilaa 'Mehram..
Na jaane kitni dafa toota hoon abhi kitna aur bikhrana baaki hai...
Khwabon me khawab dekh raha hai ek mitti ka bhut zameen pe..
Uske Khwabon ki ajal mein bas Palkon ka jhapkana baaki hai...
Wajood-e-adam ke dayaron se nikal toh chuki hai zaat meri..
Bas saanson ka rukna aur rooh ka bicharna baaki hai..
Uss roshni ki talaash mein jo phir raha hai dar-ba-dar...
Dekh Patangey ney Samait liya haunsla usme Jitnaa abhi baaki hai...
Kaun bata sakta hai yeh mulaqaat pehli yaan aakhri hai
Na jaane kitni baar mil chuka hoon tujhse aur kitni baar abhi milna baaki hai...”
―
Na jaane kitni baar mil chuka hoon tujhse aur kitni baar abhi milna baaki hai...
Har daur mein hota hai koi kirdaar mere jaisa..
Na jaane kitne qisson me zikar hai mera aur kitni kahaniyon mein abhi likhna baaki hai...
Sadiyon se chal hoon ekk kaafile ke saath saath..
Na Jaane kin Manzilon ki talaash hai aur kahan abhi Pahunchna baaki hai...
Suna hai Sau raaste jaate hai usski jaanib ki taraf ...
mujhe ek bhi nai mila, lagta hai nasamajh kadmon ka abhi Bhatkna baaki hai...
Na thama hai, na hi thamega yeh ranjishon ka silsilaa 'Mehram..
Na jaane kitni dafa toota hoon abhi kitna aur bikhrana baaki hai...
Khwabon me khawab dekh raha hai ek mitti ka bhut zameen pe..
Uske Khwabon ki ajal mein bas Palkon ka jhapkana baaki hai...
Wajood-e-adam ke dayaron se nikal toh chuki hai zaat meri..
Bas saanson ka rukna aur rooh ka bicharna baaki hai..
Uss roshni ki talaash mein jo phir raha hai dar-ba-dar...
Dekh Patangey ney Samait liya haunsla usme Jitnaa abhi baaki hai...
Kaun bata sakta hai yeh mulaqaat pehli yaan aakhri hai
Na jaane kitni baar mil chuka hoon tujhse aur kitni baar abhi milna baaki hai...”
―
“Brahma and Airavata
Long ago in lands of golden sand
Brahma turned to Saraswati
and gently kissed her inked hand....”
― Enigmatic Evolution
Long ago in lands of golden sand
Brahma turned to Saraswati
and gently kissed her inked hand....”
― Enigmatic Evolution

“अच्छ�! ठी� तो फि� मै� एक कवित� सुनाता हूँ। अग� तु� कवित� सुनत� हु� हँ� दि� तो सा� दि� लगातार नहान� पड़ेगा। बोलो मंजूर�, मैंन� शरार� से कहा।
“कविता सु� के कौ� हँसत� है� बंडल-बो� होती है कविता�, वह बोला�
“ठी� है फि� सुनो� बच्चू�, मैंन� कहा।
“हल्लम हल्ल� हौदा, हाथी चल्ल� चल्ल�
हम बैठे हाथी पर, हाथी हल्ल� हल्ल�
लंबी लंबी सूँड� फटाफ� फट्ट� फट्ट�
लंबे लंबे दाँत खटाख� खट्ट� खट्ट�
भारी भारी मूँड� मटकत� झम्म� झम्म�
हल्ल� हल्ल� हौदा, हाथी चल्ल� चल्ल�
पर्व� जैसी दे� थुलथुली थल्ल� थल्ल�
हालर हालर दे� हिले जब हाथी चल्लल।”
― UP 65
“कविता सु� के कौ� हँसत� है� बंडल-बो� होती है कविता�, वह बोला�
“ठी� है फि� सुनो� बच्चू�, मैंन� कहा।
“हल्लम हल्ल� हौदा, हाथी चल्ल� चल्ल�
हम बैठे हाथी पर, हाथी हल्ल� हल्ल�
लंबी लंबी सूँड� फटाफ� फट्ट� फट्ट�
लंबे लंबे दाँत खटाख� खट्ट� खट्ट�
भारी भारी मूँड� मटकत� झम्म� झम्म�
हल्ल� हल्ल� हौदा, हाथी चल्ल� चल्ल�
पर्व� जैसी दे� थुलथुली थल्ल� थल्ल�
हालर हालर दे� हिले जब हाथी चल्लल।”
― UP 65
“यादो� के क़िस्से।
ऐस� तो तेरे जुदा होने के पलों मे� भी मेरे दि� की सांसें ऊप� नीचे होती रहती है
लेकि� मिलन� की ख़ुशी मे� कितनी बेचै� रहती हू� ये तुम्हे� भी पत� है
लेकि� सच कहूँ तो तुमस� ज़्याद� तुम्हारी यादो� मे� रहना अच्छ� लगता है , क्योंक� जब भी मिलत� है तब थोड़� ही पलों मे� जुदा हो जाते हैं।
वही� तुम्हारी या� मेरे हर पल मे� मेरा सा� देती है�
तुम्हारी या� मेरे लि� ताजगी होती हैं।
तुम्हारी या� मेरी साँस है�
तुम्हारी या� मेरी ज़िंदगी की उदास पलों मे� भी मुझे हँसन� का बहान� देती है�
हर पल लगता है की तु मेरे कही� आस पा� हो�
खुली आँखो� से दिखत� है ये सपना सच है या फि� तु� को� आभास हो �
लेकि� सच तो यही है कि हक़ीक़� हो या आभास जो भी है मुझे बोहो� पसंद है�
क्योंक� इस सपने मे� तू ही तू है�
लो� कहते है� कि नींद का आन� क़ुदरत का वरदा� है और नींद � आन� अभिशाप है �
लेकि� अग� मुझे जो तुम्हारी या� की हर एक पल मे� जीने की इजाज़त मिले , तो मै� कर दू� नींद को भी अपने आप से परे।
और खो� रहूँ तुम्हारे ही सपनो� में।
अब हर एक मौसम भी करवट बद� रह� है , क्योंक� इस महके हु� आकाश मे� भी तेरा अं� कही छल� रह� है�
जानत� हो कही� � कही� तुम्हारी वो मुस्का� को अपनी नींद मे� लेकर मै� सोती हू� ।ऐसे ही तो तु� मेरे सपनो� मे� आक� मेरी साँसों को भी नई धड़क� दे कर जाते हो�
बस तुम्हारा ना� लिखा ही था कि मेरी आंखे� भर आयी है आग�
के कैसे लिखू� मै� अपनी यादो� की कवित�, कैसे उतार� मै� अपनी क़लम के काग़ज़ के आगे।
सु� के सारे वो पल लिखू�
या जुदा� के सारे वो ग़� लिखूँ।
जुदा� कि वो हर पल लिखन� चाहू� ,तब दि� मेरा हा� रोके
बा� बा� अक्षरो� को मिटाते हु� हो गय� मेरा काग़ज़ भी पूरा , और कहें मु� से क्यो� � लि� पा� तु� अपने जुदा� वाले यादो� के क़िस्से।
अब जब लिखा ना� तुम्हारा कही�
तो महेक उठ� मेरा कागज� भी पुराना अभी �
जैसे ही सपनो� मे� आय� हो अल� सा ही उजाल� कहीं।
आख़िरी रास्ता बन के मि� मुझे
बस एक तू ही है आधार ये भी तो पत� है तुम्हे�
जा� ले तू ये सम� की हर चा� को
बस मेरी ज़िंदगी के हर एक पल मे� बस� है तू मेरी धड़क� बन के�”
―
ऐस� तो तेरे जुदा होने के पलों मे� भी मेरे दि� की सांसें ऊप� नीचे होती रहती है
लेकि� मिलन� की ख़ुशी मे� कितनी बेचै� रहती हू� ये तुम्हे� भी पत� है
लेकि� सच कहूँ तो तुमस� ज़्याद� तुम्हारी यादो� मे� रहना अच्छ� लगता है , क्योंक� जब भी मिलत� है तब थोड़� ही पलों मे� जुदा हो जाते हैं।
वही� तुम्हारी या� मेरे हर पल मे� मेरा सा� देती है�
तुम्हारी या� मेरे लि� ताजगी होती हैं।
तुम्हारी या� मेरी साँस है�
तुम्हारी या� मेरी ज़िंदगी की उदास पलों मे� भी मुझे हँसन� का बहान� देती है�
हर पल लगता है की तु मेरे कही� आस पा� हो�
खुली आँखो� से दिखत� है ये सपना सच है या फि� तु� को� आभास हो �
लेकि� सच तो यही है कि हक़ीक़� हो या आभास जो भी है मुझे बोहो� पसंद है�
क्योंक� इस सपने मे� तू ही तू है�
लो� कहते है� कि नींद का आन� क़ुदरत का वरदा� है और नींद � आन� अभिशाप है �
लेकि� अग� मुझे जो तुम्हारी या� की हर एक पल मे� जीने की इजाज़त मिले , तो मै� कर दू� नींद को भी अपने आप से परे।
और खो� रहूँ तुम्हारे ही सपनो� में।
अब हर एक मौसम भी करवट बद� रह� है , क्योंक� इस महके हु� आकाश मे� भी तेरा अं� कही छल� रह� है�
जानत� हो कही� � कही� तुम्हारी वो मुस्का� को अपनी नींद मे� लेकर मै� सोती हू� ।ऐसे ही तो तु� मेरे सपनो� मे� आक� मेरी साँसों को भी नई धड़क� दे कर जाते हो�
बस तुम्हारा ना� लिखा ही था कि मेरी आंखे� भर आयी है आग�
के कैसे लिखू� मै� अपनी यादो� की कवित�, कैसे उतार� मै� अपनी क़लम के काग़ज़ के आगे।
सु� के सारे वो पल लिखू�
या जुदा� के सारे वो ग़� लिखूँ।
जुदा� कि वो हर पल लिखन� चाहू� ,तब दि� मेरा हा� रोके
बा� बा� अक्षरो� को मिटाते हु� हो गय� मेरा काग़ज़ भी पूरा , और कहें मु� से क्यो� � लि� पा� तु� अपने जुदा� वाले यादो� के क़िस्से।
अब जब लिखा ना� तुम्हारा कही�
तो महेक उठ� मेरा कागज� भी पुराना अभी �
जैसे ही सपनो� मे� आय� हो अल� सा ही उजाल� कहीं।
आख़िरी रास्ता बन के मि� मुझे
बस एक तू ही है आधार ये भी तो पत� है तुम्हे�
जा� ले तू ये सम� की हर चा� को
बस मेरी ज़िंदगी के हर एक पल मे� बस� है तू मेरी धड़क� बन के�”
―
“मानसरोवर सा मन मेरा तु� हो धव� कमलिनी सी,
छूटी लट छूने को अधरा मानो भँवरी पागल सी,
मधुर निशा मे� दम� रही हो सूर्� प्रभ� के मोती सी,
नम� हो गय� है मन मेरा हो तु� दिव्� रम� जैसी�”
― Muktak Shatak
छूटी लट छूने को अधरा मानो भँवरी पागल सी,
मधुर निशा मे� दम� रही हो सूर्� प्रभ� के मोती सी,
नम� हो गय� है मन मेरा हो तु� दिव्� रम� जैसी�”
― Muktak Shatak
“ज्ञा� साधन� की सीपी मे� तु� मोती बन जाओगी,
सूरज की तु� कन� रश्मियों से आभ� पा जाओगी,
जब भी होगा घो� अंधेरा सूरज भी छि� जाएग�,
लेकर चंद्रमणि से रश्म� ज्ञा� प्रभ� बन जाओगी�”
― Muktak Shatak
सूरज की तु� कन� रश्मियों से आभ� पा जाओगी,
जब भी होगा घो� अंधेरा सूरज भी छि� जाएग�,
लेकर चंद्रमणि से रश्म� ज्ञा� प्रभ� बन जाओगी�”
― Muktak Shatak

“उससे दू� रह� जिसमें हीनभावना होती है
तु� उसकी हीनत� को दू� नही� कर पाओग�
ख़ुद को श्रेष्� बतान� के चक्क� मे�
वह रोज़ तुम्हारी हत्य� करेग�”
― Nyoonatam Main
तु� उसकी हीनत� को दू� नही� कर पाओग�
ख़ुद को श्रेष्� बतान� के चक्क� मे�
वह रोज़ तुम्हारी हत्य� करेग�”
― Nyoonatam Main

“समंद� एक ऐस� प्रेमी है, जो सबसे ज़्याद� क्षम� से भर� हु� है. वह हर पल ख़ुद से दू� जाने वाली लहरो� को क्षम� करता है और वापस अपने मे� शामि� कर लेता है. जाने देना भी प्रे� है. लौटे हु� को शामि� करना भी प्रे� है.”
― Adhoori Cheezon Ka Devta
― Adhoori Cheezon Ka Devta

“तुम्हारे लि� जो कविताए� नही� लिखी� मैंन�,
वे कविताओ� से ज़्याद� है�.
जो संगी� नही� रच� मैंन�, वह संगी� से ज़्याद� है.
जो वच� मैंन� नही� निभा�,
सो इसलि� कि हमार� बी� सब कु� ख़त्� � हो जा�.
तु� तकाज़ा करती रह� और गुंजाइशे� बची रहें.”
― Nyoonatam Main
वे कविताओ� से ज़्याद� है�.
जो संगी� नही� रच� मैंन�, वह संगी� से ज़्याद� है.
जो वच� मैंन� नही� निभा�,
सो इसलि� कि हमार� बी� सब कु� ख़त्� � हो जा�.
तु� तकाज़ा करती रह� और गुंजाइशे� बची रहें.”
― Nyoonatam Main

“Mukhota
A hindi poetry anthology explores the various common elements of life. Right from religion, nature, nostalgia to love, freedom, and endless thoughts. Reading the poetries feels like touching every little aspects that constitute Life.
"Enjoy 7 days free Audiobooks for first registration”
―
A hindi poetry anthology explores the various common elements of life. Right from religion, nature, nostalgia to love, freedom, and endless thoughts. Reading the poetries feels like touching every little aspects that constitute Life.
"Enjoy 7 days free Audiobooks for first registration”
―

“डॉक्टर बनने का सपना सपना � होकर एक नाइटमेयर है जो सम� के सा� और ज्यादा भयाव� होता जाता है�”
― Nightmare
― Nightmare
“LOVE SHAYARI |HINDI LOVE SHAYARI|HINDI LOVE SHAYRI WITH IMAGES
HAZAR CHAHERON ME HINDI LOVE SHAYARI
Hazaar chaheron me ek tum hi
dil ko ache lage
Warna na chahat ki kami thi
na chahane Walon ki
PYAR WO NAHI HINDI LOVE SHAYARI
Pyaar wo nahi jo duniya
ko dikhaya jaye
pyar wo hai jo
dil se nibhaya jaye
KOI GUNAH NAHI LOVE SHAYARI
pyar karna koi gunah
nahi hota
pyar se pyara koi jazbaa
nahi hota
pyar ka rishta isliye
chipana padta hai
kyon ke suchaa pyar
logo se bardasht
nhi hota ......
FOR MORE LIKE THIS PLEASE VISIT HINSMEER.BLOGSPOT”
―
HAZAR CHAHERON ME HINDI LOVE SHAYARI
Hazaar chaheron me ek tum hi
dil ko ache lage
Warna na chahat ki kami thi
na chahane Walon ki
PYAR WO NAHI HINDI LOVE SHAYARI
Pyaar wo nahi jo duniya
ko dikhaya jaye
pyar wo hai jo
dil se nibhaya jaye
KOI GUNAH NAHI LOVE SHAYARI
pyar karna koi gunah
nahi hota
pyar se pyara koi jazbaa
nahi hota
pyar ka rishta isliye
chipana padta hai
kyon ke suchaa pyar
logo se bardasht
nhi hota ......
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―

“I threw my poems
in the ocean
the paper rotted
but poems swim
along with little fishes on the ocean floor.
- Geet Chaturvedi,
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now
in the ocean
the paper rotted
but poems swim
along with little fishes on the ocean floor.
- Geet Chaturvedi,
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now

“What I write
is water dripping from a child’s cupped hands.
- Geet Chaturvedi
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now
is water dripping from a child’s cupped hands.
- Geet Chaturvedi
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now

“The world is rapt by the sound of harsh music
and you a soft silence woven in my touch.
- Geet Chaturvedi
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now
and you a soft silence woven in my touch.
- Geet Chaturvedi
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now

“From my body, take earth and sprinkle on barren lands
From my body, take water and bestrew the desert with streams
From my body, take the sky and build roofs for the homeless
From my body, take air and purify the breath of factories
From my body, take fire, your heart is frightfully cold
- Geet Chaturvedi
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now
From my body, take water and bestrew the desert with streams
From my body, take the sky and build roofs for the homeless
From my body, take air and purify the breath of factories
From my body, take fire, your heart is frightfully cold
- Geet Chaturvedi
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now

“Downstairs I left a candle burning
In its light I'll read a few lines when I return
By the time I returned the candle had burned out
Those few lines had faded like innocence
You walk with me
The way moon walks along with a child sitting in a train window
I stood in the balcony one day
Waved a handkerchief toward the sky
Those who have gone without saying their goodbyes
Will recognize it even from far
In my handkerchief they have left behind their tears
The way early humans left behind their etchings on cave walls
Lyotard said, every sentence is a now
No. Actually it's a memory of now
Every memory is a poem
In our books, the count of the unwritten poems is so much more
- Geet Chaturvedi
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now
In its light I'll read a few lines when I return
By the time I returned the candle had burned out
Those few lines had faded like innocence
You walk with me
The way moon walks along with a child sitting in a train window
I stood in the balcony one day
Waved a handkerchief toward the sky
Those who have gone without saying their goodbyes
Will recognize it even from far
In my handkerchief they have left behind their tears
The way early humans left behind their etchings on cave walls
Lyotard said, every sentence is a now
No. Actually it's a memory of now
Every memory is a poem
In our books, the count of the unwritten poems is so much more
- Geet Chaturvedi
Translated by Anita Gopalan”
― The Memory of Now

“सारी किताबे� तुम्हारी आंखो� की तर� खुलती है�
को� से को� तक, कव� से कव� तक
किता� के भीतर बैठक�
मै� किताबे� लिखत� रह�
और तु� कहती रही�,
मेरी आंखो� के पन्न� रह-रहकर फड़फड़ात� है�.”
― Khushiyon Ke Guptchar
को� से को� तक, कव� से कव� तक
किता� के भीतर बैठक�
मै� किताबे� लिखत� रह�
और तु� कहती रही�,
मेरी आंखो� के पन्न� रह-रहकर फड़फड़ात� है�.”
― Khushiyon Ke Guptchar

“Painting 3: ज़िन्दगी, आन� किसी रोज़, बाते� करेंगे� हम बताएंग� अपने टूटे सपनो� का हा�, और पूछेंग� कि तेरी नाराज़गी का सब� क्या है...”
―
―

“प्रि�, इसके आग� कु� मत कहना�
चाँद माँग� है, चाँद पर ही रहना�
क्योंक� अग� तू धरती पर घर बनान� को कहेगी�
तो मै� तेरी फ़रमाइ� पूरी नही� कर पाऊँगा�
नौकरी वालो� की ज़िंदगी निकल जाती है�
मै� बेरोज़गा� कहाँ से घर बनाऊँगा।”
― Tuktuk ki rail
चाँद माँग� है, चाँद पर ही रहना�
क्योंक� अग� तू धरती पर घर बनान� को कहेगी�
तो मै� तेरी फ़रमाइ� पूरी नही� कर पाऊँगा�
नौकरी वालो� की ज़िंदगी निकल जाती है�
मै� बेरोज़गा� कहाँ से घर बनाऊँगा।”
― Tuktuk ki rail

“हमने कह� छोटू इस यु� मे� पढ़न� ज़रूरी है�
बिना शिक्षा के तो मानो ज़िंदगी अधूरी है�
वो बोला,
मेरा मास्टर भी मुझे यही समझाता था�
खु� टूटी साइक� से स्कू� आत� था�
अग� बचपन के मन मे�,
शिक्षा पे टूटी हु� साइक� की छा� है�
यह हमारी पीढ़ी की लि� अभिशाप है�”
―
बिना शिक्षा के तो मानो ज़िंदगी अधूरी है�
वो बोला,
मेरा मास्टर भी मुझे यही समझाता था�
खु� टूटी साइक� से स्कू� आत� था�
अग� बचपन के मन मे�,
शिक्षा पे टूटी हु� साइक� की छा� है�
यह हमारी पीढ़ी की लि� अभिशाप है�”
―

“गर्ल फ़्रें� बोली
क्या तु� मेरे लि� ता� मह� बनवाओगे।
हमने कह�
ता� मह� के बारे मे� जा� के क्या करेगी�
ता� मह� तो तब बनवाएँगे जब तू मरेगी�”
― Tuktuk ki rail
क्या तु� मेरे लि� ता� मह� बनवाओगे।
हमने कह�
ता� मह� के बारे मे� जा� के क्या करेगी�
ता� मह� तो तब बनवाएँगे जब तू मरेगी�”
― Tuktuk ki rail
“थोड़ी सी खु� मै� हू� मै�, थोड़� डर भी है
लम्होन से भर� सफ� भी है
उलझन मे� हू�; जो दे� रही हू� वो पहले देखा नही�.
जो भी है, नय� सा है; यह महसू� कभी किया नही�
खु� तो हू� पर गम की हमें फिकर भी है”
―
लम्होन से भर� सफ� भी है
उलझन मे� हू�; जो दे� रही हू� वो पहले देखा नही�.
जो भी है, नय� सा है; यह महसू� कभी किया नही�
खु� तो हू� पर गम की हमें फिकर भी है”
―

“बाहो� मे� भर के जिंदगी, ले चल मुझे कही�
कैसे हो अब ये माशुकी , तस्की� यहाँ नही�
बाहो� मे� भर के जिंदगी, ले चल मुझे कही� ...||
उत्प� कान्� मिश्� "नादा�”
―
कैसे हो अब ये माशुकी , तस्की� यहाँ नही�
बाहो� मे� भर के जिंदगी, ले चल मुझे कही� ...||
उत्प� कान्� मिश्� "नादा�”
―
“मेरा दे� महान है, हम इसकी संता� है |
जी-जा� से प्यारा हमको, प्यारा हिंदुस्तान है ||
जन-गण मन मे� मन� करें,
है� भारत माता की हम संता� |
जाति, धर्म भिन्� तथाप�,
है सबको प्यारा हिंदुस्तान ||
दे� सेवा का जब अवसर हो,
भारत मा� पर हम कुर्बा� |
शी� झुका कर नम� करें हम, करते सब इसका सम्मान ||
मेरा दे� महान, बसी है इसमे� सबकी जा� |
जी-जा� से प्यारा हमको, प्यारा हिंदुस्तान है, प्यारा हिंदुस्तान है”
―
जी-जा� से प्यारा हमको, प्यारा हिंदुस्तान है ||
जन-गण मन मे� मन� करें,
है� भारत माता की हम संता� |
जाति, धर्म भिन्� तथाप�,
है सबको प्यारा हिंदुस्तान ||
दे� सेवा का जब अवसर हो,
भारत मा� पर हम कुर्बा� |
शी� झुका कर नम� करें हम, करते सब इसका सम्मान ||
मेरा दे� महान, बसी है इसमे� सबकी जा� |
जी-जा� से प्यारा हमको, प्यारा हिंदुस्तान है, प्यारा हिंदुस्तान है”
―

“Khalo KItabat :-
ख़तो किताबत की जरूर� क्यो� तुम्हे� महसू� होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी
ख़तो किताबत की जरूर� क्यो� तुम्हे� महसू� होगी
केसा होगा तेरा, घर वो जहाँ मे� नही� हू�
यह सो� कर ही खु� हो जाऊं तस्वी� मेरी लग� ली होगी
ख़तो किताबत की जरूर�, क्यो� तुम्हे� महसू� होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी
भर� हु� क्या, कभी तुम्हे यह
लग� जो जैसे मे� आय� ,
दरवाज़े पर दस्त� की, आह� कभी तो आती होगी
दरवाज़े पर दस्त� की आह� कभी तो आती होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी
चलते चलते राहो� मे, क्या अक़्स� रु� जाते हो तु�
कभी किसी की सूरत मे मेरी झल� तो आती होगी
भू� गए हो सब कु� या, यादो� मे कही मे� बाक़ी हू�
बीते लम्ह� की कु� बाते� कभी तो सताती होगी
ख़तो किताबत की जरूर� क्यो� तुम्हे� महसू� होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी”
― "Zaki's Gift Of Love"
ख़तो किताबत की जरूर� क्यो� तुम्हे� महसू� होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी
ख़तो किताबत की जरूर� क्यो� तुम्हे� महसू� होगी
केसा होगा तेरा, घर वो जहाँ मे� नही� हू�
यह सो� कर ही खु� हो जाऊं तस्वी� मेरी लग� ली होगी
ख़तो किताबत की जरूर�, क्यो� तुम्हे� महसू� होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी
भर� हु� क्या, कभी तुम्हे यह
लग� जो जैसे मे� आय� ,
दरवाज़े पर दस्त� की, आह� कभी तो आती होगी
दरवाज़े पर दस्त� की आह� कभी तो आती होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी
चलते चलते राहो� मे, क्या अक़्स� रु� जाते हो तु�
कभी किसी की सूरत मे मेरी झल� तो आती होगी
भू� गए हो सब कु� या, यादो� मे कही मे� बाक़ी हू�
बीते लम्ह� की कु� बाते� कभी तो सताती होगी
ख़तो किताबत की जरूर� क्यो� तुम्हे� महसू� होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी
तुमन� शायद अपनी को� दुनिया बस� ली होगी”
― "Zaki's Gift Of Love"
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